क्या आयुर्वेद में मांस खाना वर्ज्जित है ? जानिए जवाब।


                        क्या आयुर्वेद में मांस खाना वर्ज्जित है ?





दोस्तों आज के समय में मांस का खाने में उपयोग  बहुत ज्यादा बढ़ गया है।    स्वाद के लिए ही रोज़ाना मांस का सेवन करते है। विज्ञानं का कहना है कि मांस में प्रोटीन ,आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते है। वहीँ हाल में ही हुये शोध से पता चलता है कि नॉन वेज खाना हमारी immunity को कमजोर करता है।  और जिससे हम जल्दी बीमार पड़ जाते है और जल्दी बूढ़े होते है। 

आयुर्वेद क्या कहता है ?

तो दोस्तों कई बार ये सवाल हमारे मन में उठता है कि क्या हमारे आयुर्वेद में भी मांस खाने की मनाही है। क्या हमारे प्राचीन समय के लोग क्या मांस खाते  थे। तो दोस्तों आज इस पर चर्चा करेंगे की क्या आयुर्वेद में मांस खाने की मनाही है या आयुर्वेद में मांस खाने को कहा गया है। यदि हाँ तो किन परिस्थितियों में। 

तो दोस्तों हमारा आयुर्वेद हिंसा और धर्म से परे सबसे पहले मनुष्य के स्वास्थ्य के बारे में चिंतन करता है। आयुर्वेद में कई अनोखी जड़ी बूटियों और नुस्खों का वर्णन है , और आयुर्वेद में मांस खाने का भी कई जगह वर्णन है। जी हाँ आयुर्वेद में मांस खाने की कहीं  भी मनाही नहीं है। परन्तु ये बाद ध्यान देने वाली है कि आयुर्वेद ये नहीं कहता कि रोज़ मांस खायो ,या अपने स्वाद के लिए किसी जीव की हत्या करो।  आयुर्वेद में  मांस खाने तभी बोला गया है जब कोई रोगी बहुत ज्यादा बीमार हो या बहुत कमजोर हो गया हो। तथा बीमारी के अनुसार मांस खाने का वर्णन है। या आपके परिवार में कई पीढ़ियों से मांस खाने की परम्परा हो। इन्हीं कुछ जगह पर मांस खाने का बर्णन है। आयुर्वेद में कहीं नहीं कहा गया है की रोज़ मांस खायो। क्योंकि मांस को पूरी तरह से पचने में 3 -4 दिन लग जाते है।  और आजकल  तो मांस भी growth harmones से तैयार किया जाता है।  जो हमारे शरीर के लिए जहर है। इसलिए मांस खाते ही है तो साफ़ सुथरा और अच्छी quality का खाएं। और रोज़ खाना बंद करें।  ये आपको बीमार कर सकता है। 


  वेद क्या कहते है ?

हमारे वेदों में मांस खाने की सख्त मनाही है। वेदों में अंडा ,मांस और मछली खाने पर रोक है। क्योंकि वेद हिंसा के विल्कुल खिलाफ है। वेदों में किसी भी जीव की हत्या को पाप माना गया है। वेदों में कहा गया है  कि मनुष्य के खाने के लिए बहुत से अनाज उपलब्ध है। गेहूं ,जों ,मक्का और कई सारी  दालें आदि। मनुष्य इन सब को  खाये उसे  खाने की कोई जरूरत नहीं है। 

  सार :

दोस्तों मांस की खपत को पूरा करने के लिए बहुत से जीवो की हत्या करनी पड़ती है इसलिए आयुर्वेद में भी मांस खाने को बहुत जरूरत पड़ने पर ही बोलै गया है क्योंकि कई बार शरीर  में कमजोरी और कोई रोग आ जाने पर मांस का खिलाना जरूरी पढ़ जाता है। नहीं तो आयुर्वेद में शाकाहारी खानो के सात कई सारे उपयोग बताये गए है।  बहीं वेद जीव हत्या और मांस खाने के सख्त खिलाफ है। दोस्तों आप मांस खाते है तो कोई बुराई नहीं है पर आप जो भी खाये ,अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखकर खाये।


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