गीता में बताया गया है कितने प्रकार का है भोजन।

                                भोजन है कितने प्रकार का। 

     
                                       


 दोस्तों गीता का हिन्दू धर्म और भारत में काफी महत्व है  , ये एक धार्मिक ग्रन्थ होने के साथ -साथ अपने आप में ही एक विज्ञानं है। इसमें बहुत सी ज्ञान की बातें बताई गयी है। चाहे वह आपके जीवन से मिलती हों या फिर आपकी सफलता से। गीता में खाने को लेकर भी वर्णन है। जिसमे बताया गया है कि  भोजन कितने प्रकार का होता है ,और उसको लेने से क्या फायदे और और हानियां हो सकती है। 

निचे मैंने गीता में दिए अनुसार ही बताया है कि भोजन कितने प्रकार का है।  और ये आपको चुनना है की कौन सा उचित है ,और आपको कौन सा लेना है। 


     भोजन के प्रकार   


1 ) सात्विक भोजन :  

 सबसे पहले इस श्रेणी में आता है  , वह है सात्विक भोजन।  गीता के अनुसार जो लोग शांत स्वभाव के होते है ,उन्हें ये भोजन अच्छा लगता है। इसमें ताज़े फल , सब्ज़ियाँ और सादा पकाया हुआ भोजन , दूध ,घी और ताज़ा दही जैसे खाद्य पदार्थ आते है । गीता के अनुसार ऐसा भोजन बुद्धि और  बल को बढ़ाता है। और ये शरीर  सुंदरता को भी बढ़ाता है। यदि आप एक विद्यार्थी है तो ये भोजन आपके लिए अच्छा रहेगा।  


2 ) राजसिक भोजन :

गीता के अनुसार जब हम सात्विक भोजन को तेज़ मिर्च - मसालों में पकाते है। तो वह राजसिक बन जाता है। ऐसा भोजन स्वस्थ्य को खराब करता है। तथा इससे एकाग्रता में भी कमी आती है। इस भोजन में आते है जैसे पकोड़े , जलेबी और तेज़ मसालों में पकी हुयी सब्ज़ियां। ऐसा भोजन स्वाद में तो बहुत अच्छा लगता है पर हमारे शरीर पर इसके काफी दुष्परिणाम हो सकते है। 


3 ) तामसिक भोजन :

इस  श्रेणी में आते है मीट ,शराब ,पैकेटों में बंद खाना  और 3 घंटे से ज्यादा पुराना खाना यदि वह प्रभु को चढ़ाया हुआ प्रशाद न हो तो। ऐसा भोजन उग्र स्वभाव के लोगों को बहुत पसन्द आता है।  ऐसे भोजन के सेवन से स्वास्थ्य खराब होता है ,तथा यह आपकी आयु को भी काम करता है।  और आपको आपके लक्ष्यों दूर ले जाता है।


दोस्तों जैसा की मैंने आपको बताया की भोजन कितने प्रकार का होता ही और गीता में इसका कैसे बर्णन दिया गया है।  दोस्तों  हमारे देश में हमें पूरा हक़ है कि हम अपनी मर्जी से जो चाहे वह खा पी सकते है ,इसलिए आपको स्कूलों में कभी मांस और शराब के नुकसान के बारे में नहीं बताया जाता।  पर ये फैसला आपको करना है की आपको किस प्रकार का भोजन करना है। जो की आपके लिए और आपके स्वस्थ्य के लिए अच्छा है। क्यूंकि हमारा स्वस्थ्य हमारे ही हाथ में है। और स्वस्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।  



 



                 

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